शनिवार, 16 अक्टूबर 2010
खाली रहने से अच्छा है चलो इंसाफ किया जाए
मैडम काफी समय से खाली चल रहीं थीं. इधर रियलिटी शो वाले प्रोड्यूसर्स ने भी उन्हें भाव देना कम कर दिया था. एक समय था जब अपने लटके-झटकों और कारनामों की वजह से उनके दरवाजे पर बड़े-बड़े शोज के जनक उनकी हां में दिन-रात एक किए रहते थे लेकिन जब से मैडम ने कुछ दिनों के लिए कंट्रोवर्सीज से दूर रहने का फैसला किया, वे छू मंतर हो गए. अब लाइम लाइट में रहने की तो मैडम को तलब सी है. चमक थोड़ी सी कम हुई और मीडिया पर्संस के कैमरे दूसरी ओर घूमे तो इनसे बर्दाश्त नहीं होता. कुछ नया और धमाकेदार करना था सो चल दीं इंसाफ की देवी बनने. भले ही अपनी लाइफ में ये इंसाफ न कर सकी हों लेकिन दूसरों की लाइफ का इंसाफ करने का जिम्मा तो उन्होंने उठा ही लिया. लोगों ने पूछा कानून की नॉलेज के बगैर कैसे कर पाएंगी, तो बोलीं इसके लिए दिमाग और दिल की जरूरत होती है. दिमाग की बात तो ठीक है लेकिन मैडम के पास दिल भी है ये जानकर लोगों को भारी हैरत हुई. बिन ब्याहे प्रेमी का दिल तोडऩे, अर्ध ब्याहे मंगेतर को रुसवा करने और सरेआम अपने परिवार को छोडऩे वाले के पास दिल भी हो सकता है, ये सोचना बड़ों-बड़ों के वश में नहीं था. अब मैडम हों और चाटेबाजी न हो, ये कैसे हो सकता है. शो पूरी तरह से शुरू भी नहीं हो सका था और मारपीट भी शुरू हो गई. यहां तो बात बनाई जानी थी लेकिन हुआ कुछ उल्टा. वाकयुद्ध तक सीमित रहे पति-पत्नियों के बीच चाटे और थप्पड़ भी चलने लगे. दर्शकों ने ये देखा तो उन्हें आगे की लड़ाई और भी रोमांचक होने की उम्मीद जगी. बस देखते ही देखते शो की टीआरपी भी बढ़ गई. अब किसी को इंसाफ मिले या न मिले, मैडम की दुकान तो चल निकली थी.
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